---- एक अजनबी ---- वर्षो बाद किसी की याद आये.. "तो उसे कभी आपना जान लेना, या मान लेना " बड़ी मूर्खता होती हैं। याद रखना," जो आपने हैं, वो अजनबी हैं। तो अजनबी तो फिर अजनबी से भी बदतर हुआ न।" शतरज के खिलाड़ी हो, साहब " कभी शे राजे को पेयादा दे जाता हैं। " गोली कभी चलती नहीं, आवाज करती हैं, साहब बाहुदर। " किसी के आगे कितना गिर सकते हो, मुंडी तो जमीन पर ही रहेगी, बारखुरदार। " जीना किसे