" एक बात बताइए आप के भाई रोज ऐसे ही रात रात भर घर से गायब रहते थे या ये स्पेशली हमारे लिए ही है???"... तपस्या का भड़कना जारी था। श्लोक को समझ ही नहीं आया क्या बोले वो खामोश ही रहा।"आपके खामोशी का मतलब हम हां ही समझे ना देवर जी!!".. श्लोक को खामोश देखकर वो वापस से भड़क गई। "भाभी भाभी प्लीज आप शांत रहिए पहले और हां भाई वैसे भी कम ही घर आते थे लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि वो हर बार उस छिपकली के पास ही जाते थे !भाई वर्कोहलिक है मुश्किल से