हनुमंत पच्चीसी और अन्य छंद - भाषा टीका श्री हरि मोहन लाल वर्मा - 5

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हनुमंत पच्चीसी और अन्य छंद 5 'हनुमत हुंकार' संग्रहनीय पुस्तक प्रस्तुत 'हनुमत हुंकार' पुस्तक में हनुमान जी के स्तुति गान और आवाहन से सम्बंधित लगभग 282 वर्ष पहले मान कवि द्वारा लिखे गए 25 छंद हैं , जिनके अलावा उन्ही मान कवि के छह छंद ' हनुमान पंचक' के नाम से शामिल किए हैं, तथा 'हनुमान नख शिख' के नाम से 11 छंद लिए गए हैं।   बैरिन कौं बार बार छली कर छार-छार, मार मार मूढ़ जार जार दे ज्वरन कौं। भनै कवि 'मान' हनुमान बलवान, हाँक हन हन हुड़े खन खन बिमुखन कौं ॥ भेदिन कौं भिन्द भिन्द