पीड़ा में आनंद - भाग 4 - तुम्हारी मुस्कान

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 तुम्हारी मुस्कानअचला लगभग दौड़ती हुई लिफ्ट में दाखिल हुई। आज उसे देर हो गई थी। छुट्टी से कुछ देर पहले ही बॉस ने एक ज़रूरी काम पकड़ा दिया। रोज़ के समय से एक घंटे बाद ऑफिस से निकल पाई। लोकल के लिए दस मिनट इंतज़ार करना पड़ा। वह डर रही थी कि उसके घर पहुँचने से पहले वह निकल ना जाए।लेकिन जिसका डर था वही हुआ। घर पहुँची तो सास ने बताया कि मनीष बस कुछ देर पहले ही निकल गया। अचला को अफसोस हुआ। उसने बैग सोफे पर डाला और खुद भी बैठ गई।कितना चाह रही थी वह कि