पीड़ा में आनंद - भाग 3 - बसंत बहार

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  बसंत बहारमालिनी ने कॅलबेल बजाई। वह बाहर गई थी। दस दिन बाद वह कल लौटकर आई थी। सरला ने दरवाज़ा खोला। उसने कहा,"नमस्ते दीदी। बहुत दिनों के बाद आईं।"मालिनी अंदर आकर सोफे पर बैठ गई। अपना हैंड बैग टेबल पर रख कर बोली,"हाँ घर जाना पड़ा। मम्मी की तबीयत ठीक नहीं थी।""अब कैसी हैं वो ?""ठीक हैं। तभी तो वापस आई हूँ।"सरिता ने उसे पानी लाकर दिया। पानी पीकर मालिनी ने पूछा,"मैम के क्या हाल हैं ?"सरिता ने उदास होकर कहा,"वैसी ही हैं। दिन भर गुमसुम सी बैठी रहती हैं। मैं जबरदस्ती करके कुछ खिला देती हूँ। वरना आजकल