गर्भ-संस्कार - भाग 11

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प्राणायामप्राणायाम में महत्वपुर्ण इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना नाडीमनुष्य की नाभि के पार्श्व में कुछ नीचे और ऊपर कुण्डलिनी का स्थान है। इस कुण्डलिनी के पार्श्व में नाभिकंद के बीच पंद्रह प्रमुख नाड़ियों का स्थान है।१) सुषुम्ना, २) इडा, ३) पिंगला, ४) गांधारी, (५) हस्तजिह्वा ६) पूषा, (७) यशस्विनी ८) शूरा गन्ध ९) कुहू १०) सरस्वती ११) वारुणी १२) अलम्बुना, १३) विश्वोदरी, १४) शालिनी, १५) चित्राइन पंद्रह में से भी सुषुम्ना, इडा पिंगला– ये तीन प्रधान हैं (जिनका योग से घनिष्ठ सम्बन्ध है) इन तीनों में सुषुम्ना सर्वश्रेष्ठ है। इनमें सुषुम्ना नाड़ी समस्त शरीर को धारण करती है। यही मोक्ष मार्ग