गर्भ-संस्कार - भाग 9

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पति का कर्तव्यगर्भिणी वांच्छितं द्रवं तस्यै दद्याद्यथेचितम्। सूते चिरायुषं पुत्रं अन्यथा दोषमर्हति।।“गर्भिणी की इच्छा जिस जिस वस्तु पर जाएगी वह हर वस्तु "योग्य हो तो" पती उसे अवश्य लाकर दे जिससे वह उत्तम व चिरायु शिशु को जन्म देगी। पर गर्भवती की ईच्छा पुरी ना की जाये तो वह दुःखी, असहज व उदास होगी जिस कारण गर्भ भी सदोश उत्पन्न होगा!” इसलिए "सदा कार्येप्रियं स्त्रियः।" गर्भिणी जिस कारण प्रसन्न रहेगी, ऐसा ही उत्तम बर्ताव उसके साथ घर में सभी छोटे बड़े लोग रखें, ऐसी शास्त्राज्ञा बताई गई है।गर्भवती की इच्छा को संस्कृत में "दौर्हृद" कहा गया है। दौर्हृदिनी का अर्थ दो