संत श्री साईं बाबा - अध्याय 15

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पाठकों को स्मरण होगा कि छठें अध्याय के अनुसार शिरडी में रामनवमी उत्सव मनाया जाता था । यह कैसे प्रारम्भ हुआ और पहले वर्ष ही इस अवसर पर कीर्तन करने के लिये एक अच्छे हरिदास के मिलने में क्या-क्या कठिनाइयाँ हुईं, इसका भी वर्णन वहाँ किया गया है। इस अध्याय में दासगणु की कीर्तन पद्धति का वर्णन होगा ।नारदीय कीर्त्तन पद्धतिबहुधा हरिदास कीर्त्तन करते समय एक लम्बा अंगरखा और पूरी पोशाक पहनते हैं । वे सिर पर फेंटा या साफा बाँधते है और एक लम्बा कोट तथा भीतर कमीज, कन्धे पर गमछा और सदैव की भाँति एक लम्बी धोती पहनते