खामोश लफ्ज़

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1."ख़ामोश लफ़्ज़"ख़ामोश लफ़्ज़, बेज़ुबान रातें,आँखों में बसी कुछ अधूरी बातें।चाँद भी थककर सो गया है,पर दिल मेरा अब भी रो गया है।सांसें चलती हैं, पर रूह ठहरी है,तेरी यादें अब भी वहीं ठहरी हैं।हवा में घुला है तेरा अहसास,पर छू नहीं सकता, यही है त्रास।एक मोड़ था, जहाँ हम रुके थे,एक लम्हा था, जब हम जुड़े थे।अब वही मोड़, वीरान लगता है,तेरी यादों का तूफान लगता है।लफ़्ज़ बिखरते हैं, मगर जुड़ते नहीं,ज़ख़्म पुराने हैं, मगर मिटते नहीं।इश्क़ था, या बस एक फ़साना,पर दिल कहता है, तुझे भुलाना न आना।2."टूटी शाख का दर्द"सूखा हुआ एक पत्ता हूँ,टूटी शाख से बिछड़ा हूँ।कल