रमिया की आँखों के आगे सब धुंधला था। गिरने की उस एक घटना ने जैसे उसकी पूरी दुनिया को हिला दिया था। गाँव के बाहर की ढलान पर ईंटों का एक छोटा ढेर पड़ा था, वहीं से लौटते वक़्त उसका पैर फिसला और पीठ के बल गिरी। कमर में अजीब-सी सनसनाहट हुई थी और फिर कुछ महसूस नहीं हुआ।जब आँख खुली, तो उसने खुद को अस्पताल के सफ़ेद बिस्तर पर पड़ा पाया। चारों ओर अजनबी चेहरे, ट्यूब लाइट की चुभती रौशनी, दवा की कड़वी गंध... और वो सफेद चादर, जिस पर उसकी गरीबी पहली बार आराम कर रही थी।कमर की