अल - अमानह : सल्तनत की किस्मत - 2

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दूसरा अध्याय : अली की बेचैनी और एक अनसुलझी पहेलीअली के साथ हुई उस घटना से अब अली परेशान रहने लगा। अब वह अपने आपको एक रहस्य में छुपा हुआ पाता था।उसकी आँखों की नींद उड़ चुकी थी। अली के मन और कान में दिन-रात शेख हमजा के आखिरी शब्द गूंजते थे—"अल-अमानह... आखिरी वारिस... वो तलवार..."अली हर समय सोचता था,"क्या वो बूढ़ा शेख हमजा सच बोल रहा था? क्या मैं आखिरी वारिस हूँ? ये अल-अमानह... वो तलवार... इसका रहस्य क्या है? और वे लोग कौन थे जिन्होंने मुझ पर हमला किया? आखिर वह मुझसे क्या चाहते थे? मुझे इस रहस्य