बेवफा - 19

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रहस्य और भय का विस्तारसभी की साँसें थमी हुई थीं। तहखाने में फैली अजीब-सी खामोशी और दीवार पर उभरती परछाईं ने माहौल को और डरावना बना दिया था।समीरा ने धीमी आवाज़ में कहा, "हमें यहाँ से निकलना चाहिए। यह जगह ठीक नहीं लग रही।"राहुल ने सहमति में सिर हिलाया, लेकिन विजय अब भी दीवार पर नजरें गड़ाए खड़ा था। "अगर यह परछाईं सच में किसी की है, तो हमें यह पता लगाना होगा कि यह कौन है," उसने कहा।सभी ने चारों ओर देखा। तहखाने की ठंडी हवा में एक अजीब-सा सिहरन थी। अचानक, एक पुरानी लकड़ी की अलमारी खुद-ब-खुद चरमराते