रौशन राहें - भाग 15

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भाग 15: सशक्तिकरण की नई धाराकाव्या का संघर्ष अब एक वैश्विक पहचान बना चुका था। दुनिया भर में उसे एक परिवर्तनकारी नेता के रूप में देखा जाने लगा था, और वह जानती थी कि उसका उद्देश्य अब केवल व्यक्तिगत स्तर पर महिलाओं की स्थिति सुधारना नहीं है, बल्कि एक पूरी नई दिशा की स्थापना करना है। समाज के हर पहलू को, हर कोने को बदलने का काम अब उसकी जिम्मेदारी बन चुका था। वह समझ चुकी थी कि हर व्यक्ति को, चाहे वह पुरुष हो या महिला, बराबरी के अधिकार मिलने तक उसका संघर्ष खत्म नहीं होगा।दुनिया भर में आंदोलन