आखेट महल - 18

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अठारह   गौरांबर ने देखा, प्लेटफॉर्म पर एक बेंच के पास छोटे-छोटे दो बक्से लिए और एक औरत चुपचाप बैठी है। औरत में जरूर कुछ-न-कुछ ऐसा था कि गौरांबर को एक बार देखकर फिर दोबारा उधर देखना पड़ा। औरत ने अपनी साड़ी का पल्ला सिर पर काफी खींचकर ले रखा था और साड़ी की बारीक किनारी कानों के ऊपर से लपेट कर दूसरे हाथ में ले रखी थी। गौरांबर को अजीब-सा लगा। इस समय न तो ऐसी ठंड थी जिसके कारण वह सिर को इस तरह से लपेटे और न ही वह इतनी प्रौढ़ा या वृद्ध थी कि पुराने तरीके