हथियार

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प्रौढ़ साक्षरता अभियान के तहत कस्बे में शुरू की गई रात्रि पाठशाला में आई कुछ प्रौढ़ महिलाएं शिक्षा ग्रहण कर रही थीं। कक्षा अध्यापिका श्रीमती गीता जी ने मानव सभ्यता के क्रमिक विकास के बारे में महिलाओं को समझाते हुए कहा, "जैसा कि हम जानते हैं, आवश्यकता आविष्कार की जननी होती है। मानव सभ्यता के विकास में भी जैसे जैसे आवश्यकता महसूस होती गई वैसे वैसे मानव शरीर में क्रमिक परिवर्तन होता गया। पाषाण युग में जब इंसान गुफाओं में रहा करता था, उसके तीक्ष्ण नाखून व लंबे दाँत उसके लिए हथियारों का काम किया करते थे, ठीक वैसे ही