यारबाज़ - 16 - अंतिम भाग

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यारबाज़ विक्रम सिंह (16) घर के अंदर प्रवेश करते ही जैसे ही मैं अपने जूते के तसमें खोलने लगा कि मां ने रसोई से ही मुझे कहना शुरू किया," अरे फिर तुम चले गए थे इंटरव्यू देने। पापा ने तुम्हे मना किया है ना इधर उधर फालतू की भटकने के लिए।" पर मैं बिना कुछ जवाब दिए चुपचाप जूते तसने खोलता रहा। फिर मां ने कहा," कैसा रहा इंटरव्यू ठीक गया है ना अपने बारे में सब ठीक से बता दिया है कंप्यूटर वगैराह सब आता है।" " हां बता दिया है सब कुछ।" मां प्यार से समझाने की कोशिश करने लगी ठीक