कुनबेवाला

(480)
  • 2.9k
  • 863

कुनबेवाला “ये दिए गिन तो ” मेरे माथे पर दही-चावल व सिन्दूर का तिलक लगा रही माँ मुस्कुराती है वह अपनी पुरानी एक चमकीली साड़ी पहने है उस तपेदिक से अभी मुक्त है जो उस ने तपेदिक-ग्रस्त मेरे पिता की संगति में पाया था सन् १९४४ में जिस वर्ष वह स्वर्ग सिधारे थे “भाई को गिनती आती है,” साथ में बहन खड़ी है रिबन बंधी अपनी दो चोटियों व नीली सलवार कमीज़ में वैधव्य वाली अपनी उस सफ़ेद साड़ी में नहीं, जो सन् १९६० से ले कर सन् २०१० में हुई उस की मृत्यु तक उस के साथ लगी रही थी