एक छोटी सी भूल

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एक छोटी सी भूल ‘ अनु, आज मैं बहुत खुश हूँ, आज हमारी पूर्ण परिवार की कल्पना सार्थक हो गई है, पुत्र हो या पुत्री इससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन केवल पुत्र या केवल पुत्री के होने से कहीं न कहीं मन में एक अधूरेपन का अहसास रह ही जाता है ।’ एक पुत्री के पश्चात पुत्र के जन्म के उपलक्ष्य में दी गई पार्टी के पश्चात विमल ने अनुपमा को बाहों में समेटते हुए कहा । वस्तुतः पहले पुत्री होने से दोनों के दिलों में धुकधुकी मची हुई थी कि कहीं इस बार भी पुत्री