किशोरीलाल की खाँसी किशोरीलाल की खाँसी का प्रारम्भ व अन्त अजीब व विवादास्पद रहा| जिस दिन उसकी पत्नी के तपेदिक का इलाज शुरू किया गया, उसी दिन से किशोरीलाल को उसकी खाँसी ने जो पकड़ा सो उसकी पत्नी की मृत्यु के बाद ही उसे छोड़ा| किशोरीलाल हमारा पड़ोसी था और उसकी बड़ी बेटी बारहवीं जमात तक मेरे साथ एक ही स्कूल में पढ़ती भी रही थी, फिर भी किशोरीलाल को उसकी व उसके परिवार-जनों की अनुपस्थिति में हम उसे ‘चचा’ अथवा ‘काका’ जैसे आदरसूचक सम्बोधन के बिना ही पुकारा करते थे| उसकी वजह गली में स्थित उसकी परचून की दुकान