आब-दाना “सरकार, चाय?” दरवाजे पर दस्तक के साथ आवाज आई उषा ने मोबाइल की घड़ी पर नजर दौड़ाई सुबह के पाँच बजे थे “चाय, सरकार?” दरवाजे पर दोबारा दस्तक हुई बिस्तर से उषा ने चिल्लाना चाहा किन्तु अपनी आवाज को बचा कर रखना उसके लिए जरूरी था डॉक्टर ने उसके गले की खराबी को गंभीर बताया था, ‘यू हैव अ टीचर्स थ्रोट, मिसेज त्रिपाठी आपका लैरिंक्स बहुत नाजुक हालत में जा पहुँचा है ऑब्जर्व वॉयस रेस्ट ऐज मच यू कैन (जहाँ तक हो सके आवाज को आराम दीजिए) ’ “चाय?” दरवाजे पर तीसरी बार दस्तक हुई दरवाजा खोलने पर उषा ने