खुद खुदी से

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खुद खुदी से वो जब मिली मैं अपनी उम्र की तीसरी बादान पर थी....फिसल कर चौथी पर गिरने से ठीक पहले खुद को संभालती हुई. मुझे पता ही नहीं चला इतने सारे बरस मेरे सिर पर से कैसे गुज़र गए और मैं क्यों मिट्टी के नीचे दबी रह गई, अनअंकुरित. मैंने अभी-अभी अपना अंखुआ देखा है, जब मैं गिरने से खुद को बचा रही थी तो सहसा मेरे भीतर किसी की नींद टूट गई और वह खड़ी हो गई. उसके खड़े होते ही वह अंखुआ मैंने देख लिया, पहले तो मुझे यकीन ही नहीं हुआ फिर मैं जोर से रो