11. प्रार्थना

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हे दीनबन्धु दयालु भगवन दुःख भय संशय हरण । जग मोह जाल कराल है आया प्रभू तेरी शरण ।। मैं पतित हूँ तुम पतित पावन, दास मैं तुम नाथ हो। दिन रात सोते जागते प्रभु तुम हमारे साथ हो ।।