पंकजजी सुबह की सैर से लौटकर घर के आंगन की लान में रखी हुई कुर्सी में जैसे ही बैठे उनकी धर्मपत्नी सुधा ने उनके हाथ में अखबार पकडाया और वहीं दूसरी कुर्सी में बैठ गई। वह भी एक दूसरा अखबार लेकर सरसरी नजरें दौडाने लगी ,लेकिन सारा ध्यान पति के अगले हुक्म की ओर था। थोडी देर बाद पंकजजी ने जैसे ही चश्मा नीचे करके बडे रौब से सुधा की ओर देखा तत्काल वह इशारा समझकर उठी और किचन में जाकर उनके लिए चाय बनाने लगी। उनकी दोनों बहुएँ नाश्ते की तैयारी में लगी हुई थीं। रोज की तरह बहुओं