इनाम

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इनाम ------ बहते हुए पानी में जैसे कोई छोटा बच्चा कागज़ की नाव चला दे, कुछ ऐसे ही उसने अपने जीवन की नाव को जीवन के समुद्र में बहने के लिए छोड़ दिया ।आख़िर कब तक लड़ सकता है कोई ? वैसे ही न जाने हर आदमी में कितने युद्ध भीतर ही भीतर चलते रहते हैं ! कोई न कोई परेशानी चुंबक बनी खींचती ही रहती है, न खींचे तो वह पुकारता है 'आ बैल ! मुझे मार ! ' ज़िंदगी कुछ लम्हों का नाम है या एक पल का या फिर एक