इश्क़ ने बुँदे थे जो गजरे नुकीले हो गए,
तेरे हाथोंमें ये कंगन भी ढीले हो गए।

फूल अकेले रह गए इन शाख पर,
गाव की सब तितलिओ के हाथ पिले हो गए

क्या जरुरी हैं हमभी करे विषपान शिव की तरह।
सिर्फ जामुन खा लिए और होंठ नीले हो गए।

Hindi Shayri by mayank makasana : 432
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