हर बार मुजे कुछ नया सीखाती थी..
अपने हर सपने मुझसे बांटा करती थी..
कोई और नही वो मेरी बहेन ही थी..
वो हररोज छोटी छोटी बात में मुझसे लड़ती थी..
पता नही कैसे पर हर बार मुजे मना लेती थी..
कोई और नही वो मेरी बहेन ही थी..
मेरी गलतियों को वो ही गिनती थी...
और फिर पापा से मेरी पिटाई भी करवाती थी..
कोई और नही वो मेरी बहेन ही थी..
जब मेरी आँखें आंसु भर आती थी..
गुस्से वाली वही बहेन थोड़ी देर में ही पिगल जाती थी..
कोई और नही वो मेरी बहेन ही थी..
आज भी मुजे वो उतना ही प्यार करती है
.. BHAVESHSINH