कभी धुंधले आयने को भी देखो,
पता नही किसकी छवि हे फिरभी उसे अपने अंदर ही रखो,
हर रोज ना देखो तो कोई बात नही,
कोन हे अंदाज लगाओ जुठा ही सही,
भला आयना ही तो हे उसे क्या डरना,
उस धुंधलेपन से डरते डरते भला हररोज क्यु मरना,
चलो आज सफाई करते हे,
उस धुंधलेपन को साफ करते हे,
सज धज के में उसके सामने गया,
पता नही मुजे ये क्या हो गया,
डरता था अपने आप से तो अब कहा खो गया,
पता नही क्यु पर जो साफ दिख रहा था वो फिर धुंधला हो गया...