बेटियां 💞💞💞💞
"शादी करके एक दिन सबको अपने घर जाना है,
बेटियाँ तो होती ही पराई हैं, यह सारा ज़माना कहता है।
बचपन से जिस गुड़िया को अपनी पलकों पर बिठाकर पाला-पोसा,
वक्त आते ही उसे अपनों से दूर कर देता है—
यह दुनिया का कैसा अजीब और बेदर्द रिवाज़ है,
जो अपनी ही खून-पसीने से सींची हुई बेटी को पराया कर देता है?"
"जिस आँगन में उसकी किलकारियाँ गूँजी थीं,
जहाँ उसने अपने बचपन के हर रंग बिखेरे थे,
वह अपना सारा संसार, वह हँसता-खेलता घर-आँंगन छोड़कर चली जाती है।
वह एक नाज़ुक कली की तरह पलती है,
और फिर एक महकते हुए फूल की तरह जाकर दूसरों का घर आबाद करती है।"
"नया घर, नए लोग और अनजाने रास्ते...
सब कुछ नया होने के बावजूद वह हर एक रिश्ता पूरी शिद्दत से निभाती है।
कभी वह खुद को उन नए साँचों में ढालने की कोशिश करती है,
तो कभी अपने संस्कारों और प्रेम से उन अजनबियों को अपना बना लेती है।"