रिश्तों में बंधन ही हो ऐसा जरूरी नहीं ,
पानी भी बहने को किनारा तोड़ देता हैं।
कोई रस्सी को ही वजूद माने जरूरी नहीं,
खोटा सिक्का भी गिरे तो आवाज करता है।
मकाम और मकान एक हो जरूरी नहीं ,
खानाबदोश भी जिंदगी जी लेता है।
नींद से उठो तो सपने याद रखना जरूरी नहीं,
अपनो का इल्जाम वहां दस्तक दे सकता हैं।
कोई गीता , कोई कुरान समझा दे जरूरी नहीं,
अपना अर्जुन अपना ही श्याम हो सकता हैं।
हाथ उठे तो बंदगी ही हो ज़रूरी नहीं,
कोई खुदा से फ़रियाद भी कर सकता है।