कैसे कहें तुमसे, तुम चले गए इतनी दूर,
दिल के लफ़्ज़ जुबां पर आकर, रुक जाते हैं हुज़ूर।
आहें भरती ये धड़कनें, तुझे गले लगाने को,
फिर भी ये फासले मिटते नहीं, दिल को समझाने को...
कैसे कहें तुमसे, तुम चले गए इतनी दूर...
बरसों से छाई मायूसी, चेहरे से हटती नहीं,
ये काली तन्हा रातें अब, काटे से कटती नहीं।
यादों का एक साया है, जो हरदम साथ चलता है,
तेरे बिना ये दीवाना दिल, हर लम्हा मचलता है।
कभी उदासी बनकर तो, कभी आँसू बनकर,
तुम चेहरे पर छा जाते हो, एक मुकद्दर बनकर।
आख़िरी सांस तक ये दिल, बस तुझको ही चाहेगा,
तू दूर भले ही है मुझसे, पर रग-रग में समाएगा।