दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है
दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है,
आख़िर इस दर्द की दवा क्या है।
हम हैं मुश्ताक़ और वो बेज़ार,
या इलाही! ये माजरा क्या है।
मैं भी मुँह में ज़बाँ रखता हूँ,
काश पूछो कि मुद्दआ क्या है।
जब कि तुझ बिन नहीं कोई मौजूद,
फिर ये हंगामा ऐ ख़ुदा क्या है।
ये परी-चेहरा लोग कैसे हैं,
ग़मज़ा-ओ-इश्वा-ओ-अदा क्या है।
शिकन-ए-ज़ुल्फ़-ए-अंबरीं क्यों है,
निगह-ए-चश्म-ए-सुरमा सा क्या है।
writer मिर्जा ग़ालिब
मेने कॉपी पेस्ट किया है hihihihi 😅