हर बार जब मैंने अपने जज़्बातों को मारकर खुद को बेरहम और पत्थरदिल बनाने की कोशिश की, जब सोचा कि अब किसी की परवाह नहीं करूँगा, अब बस खुद के लिए जियूँगा...
तब अंदर कहीं एक टूटी-सी आवाज़ आई "नहीं भाई, तू ऐसा नहीं है..."
तू वो है जो आधी रात खुद तन्हा रोकर भी सुबह किसी और के चेहरे पर हँसी लाने की कोशिश करता है।
तू वो है जो अपने टूटे हुए हिस्सों को भी किसी और की उम्मीद बना देता है।
तू वो है जो खुद हजार बार टूटा, लेकिन किसी और को टूटने नहीं. दिया।
दुनिया ने कहा सख्त बनो, मतलबी बनो, पर दिल ने हर बार कहा "तू वो लड़का है जो दर्द में भी वफ़ा निभाता है, जो इग्नोर किए जाने के बाद भी फिक्र करना नहीं छोड़ता, जो छोड़ दिए जाने के बाद भी दुआ देना जानता है।"
और यही तेरा सबसे बड़ा दर्द है...
कि तू आज भी अच्छा रहना चाहता है, उस दुनिया में जहाँ अच्छाई की कमजोरी समझा जाता है