कभी सोचता हूँ, तुझसे मिलना एक हादसा था या तक़दीर का लिखा, क्योंकि जितना तुझे चाहा, उतना तो खुद को भी नहीं चाहा...!!
तेरे साथ बिताए हर लम्हे ने कुछ सिखाया कभी मुस्कुराना, तो कभी चुपचाप दर्द छुपाना आज तू साथ नहीं है, मगर तेरा एहसास हर रोज़ साथ होता है...!!
तेरी यादें मारती हैं, के देख जो सबसे अपना था आज सबसे अजनबी बन बैठा है जिंदगी चाहे जितनी भी बदल जाए, मगर तू मेरी थी ये हक़ कोई नहीं छीन सकता ना शिकवा है तुझसे, ना नफ़रत...!!
बस एक बात कहनी है अगर कभी तन्हा बैठे तो इतना ज़रूर याद करना, एक लड़का था जो तुझे दिल की गहराइयों से चाहता था और आज भी उसी सच्चाई से चाहता है...!