शादीशुदा से प्यार !
माना कि मुझे शादीशुदा से प्यार है, पर मैंने कभी भी उनके घर-गृहस्थी को तोड़ने का ख्याल तक नहीं किया। मेरा प्यार हमेशा उनकी मुस्कान तक, उनकी खुशियों की दुआ तक सीमित रहा, यह दिल निस्वार्थ भाव से बिना किसी लालच के चुपचाप उसे चाहता है, बस उनकी खुशी में सुकून ढूंढता है, और मेरी ये मोहब्बत उम्रभर कायम रहेगी।