આજે ૦૨ સપ્ટેમ્બર (૧૯૭૦) એટલે કે આજરોજ કન્યાકુમારીના સમુદ્રની એક મોટી શિલા(ચટ્ટાન) પર નિર્મિત થયેલ "વિવેકાનંદ સ્મારક શિલા" ભવનનું ઉદ્દઘાટન પૂર્વ રાષ્ટ્રપતિ સ્વ.વી.વી.ગિરી દ્વારા કરવામાં આવેલું. હવે તો આ સ્થળ એક "ટુરિસ્ટ પોઇન્ટ" તરીકે જાણીતું થઇ ગયું છે.
રાષ્ટ્રીય સ્વયં સંઘના સહકાર્યવાહ સ્વ.શ્રી એકનાથ રાનડેના અથાગ પ્રયાસો થકી આ ભવનનું નિર્માણ થયેલું.
વિવેકાનંદ સ્મારક સમિતિ એનું સંચાલન સંભાળે છે.
कन्याकुमारी के शिल्पी रानाडे द्वारा =========(02.09.1970)===== आपकाजन्म19नव.1914 को ग्राम टिलटिला, जिला अमरावती,महाराष्ट्र में हुआ.1962में वे अ.भा. बौद्धिक प्रमुख बने.1963 में स्वामी विवेकानन्द की जन्म शताब्दी मनायी गयी.और फिर इसी समय, कन्याकुमारी में उस जिस शिला पर बैठकर स्वामी जी ने ध्यान किया था, वहाँ स्मारक बनाने का निर्णय कर और पूज्य गुरूजी के आशिर्वाद से श्री एकनाथ जी को यह कार्य सौंपा गया।दक्षिण में ईसाइयों का काम बहुत बढ़ रहा था।उन्होंने तथा राज्य, केन्द्र सरकार ने इसमें बहुत रोड़े अटकाये;पर एकनाथ जी ने हर समस्या का शांति से हल निकाला।इस स्मारक हेतु बहुत धन चाहिए था।स्वामी विवेकानन्द युवाओं के आदर्श हैं,इस आधार पर एकनाथ जी ने जो योजना बनायी,उससे देश भर के विद्यालयों,छात्रों,राज्य सरकारों,स्थानीय निकायों और धनपतियों ने इसके लिए धन दिया।जन जन से प्रेम पूर्वक एक एक रूपया लिया और फिर इस प्रकार सबके सहयोग से बने इस शिला स्मारक का उद्घाटन 02सित.1970 में उन्होंने तब के राष्ट्रपति श्री वी.वी. गिरि से कराया.1972 में उन्होंने विवेकानन्द केन्द्र की गतिविधियों को सेवा की ओर मोड़ा।युवक एवं युवतियों को प्रशिक्षण दे देश के वनवासी अंचलों में भेजा।यह कार्य आज भी जारी है* ।इस सारी दौड़धूप से उनका शरीर जर्जर हो गया *22अगस्त1982को मद्रास में भारी हृदयाघात से उनका देहान्त हो गया. कन्याकुमारी में बना स्मारक स्वामी विवेकानन्द के साथ श्री एकनाथ रानडे की कीर्त्ति का भी सदा गान करता रहेगा.सादर वंदन.सादर नमन🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏*