आंखे ज़ुकती है...
पलके जपकती है...
जब तू सामने आती है..
हररोज जिंदगी कुछ नया शिखा जाती है,
खुशियो के साथ गम भी ले आती है,
उसके बावजूद भी अंदर ही अंदर मुस्कुरा लेता हूं ,
दूर होके भी तू जब सामने आती है..
ठोकरे खा के आज जिस्म के साथ रूह भी जली....
दर्द को छोड़के में थम सा गया,
जब तेरी नजरो से नजर मिली...
जिंदगी गीत बनके गुनगुनाती है..
जब मेरी रूह तेरी परछाई छू लेती है..
शिकायतों के सिवा कुछ नही था मेरे पास,
हर जवाब में छिपी थी तुजे पाने की आस,
हर बार तुजे पाने की नाकाम कोशिश
मुजे तुजसे दूर ले जाती है....
कसूर नही है जिंदगी तेरा,
ये कहानी हरेक के साथ दोहराती है...
साथ मिलके ख्वाब भी रोते है,
जब अपने ही छोड़ जाते है,
जिंदगी ढुढती रहेती है उसे,
पर वो सिर्फ लम्हे बनजाते है..
- BHAVESHSINH