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વૈભવકુમાર ઉમેશચંદ્ર ઓઝા

વૈભવકુમાર ઉમેશચંદ્ર ઓઝા Matrubharti Verified

@vibhuradhuyahoocom1792
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कत्लही करना है तो खंजर ही चला देते जालिम।
यूं तिरछी नज़रसे घायल क्यों कर गए?
- स्पंदन

मुझे किसी और मयखानेकी क्या जरूरत?
मैने तेरी आंखोसे शराब पी है।
- स्पंदन

अजी आप हंसिए मत,
हम होश खो बैठते है,
और जब होश में आते है,
तो आप फिरसे मुस्कुरा देते हो।
- स्पंदन

शराबमें वो नशा कैसा?
जो तेरी नझरकी शुओं मै है।
- स्पंदन

यूहीं तेरी गलीसे हम गुजरते थे,
मगर जब तुम्हे देखा तो,
राह खफा होगइ और मंज़िल तुम बन गई।
- स्पंदन

उसने सुरमा क्या लगा दिया आंखोंमे,
हमारे सुर बेसुर हो गए।
- स्पंदन

તું છત્રી નીચે કોરી ઊભી રહી અને,
હું તારી આંખોના પલકારામાં ભીંજાઈ ગયો.
- સ્પંદન

तूने ओढ़नी क्या सूखने डाली,
पूरा बाग हरा हो गया।
- स्पंदन

जबसे देखा है तुझे,
हम बंधुआ मज़दूर हो गए है तुम्हारे।
- स्पंदन

किसी कामसे आपकी गली से इत्तेफाक से गुज़रे थे,
झरोखेंमें आपको देखके हम किसी कामके ना रहे।
- स्पंदन