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Shilpy Aggarwal

Shilpy Aggarwal

@shilpy
(880)

झूठ मुझे भाया ही नहीं
और जो कुछ भी सच था,
तू सुन पाया ही नहीं
इन दोनों के बीच, बसी जो दुनियादारी
ज़माना रोज़ सिखाता गया
मगर सीख पाया ही नहीं
- Shilpy Aggarwal

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होठों से हँसी, दिल से हर एक टीस गई जबसे
अकेले में ख़ुद से मिलने से बचता फिरता हूँ
अंदर बस शोरगुल है, रहा बाक़ी नहीं कुछ भी
गूँजते ख़ालीपन से अब ज़रा घबराया करता हूँ
मुखौटे हैं, दिखावट है, छलावे की ये दुनिया है
भीड़ और जगमगाहट में कहीं खो जाया करता हूँ
उमंगें और चाहतें अब उड़ाने भर नहीं पाती
मशीनों के जैसे ही मैं भी बस चलता रहता हूँ।

- Shilpy Aggarwal

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अजीब है आज का इंसान भी,
अकेलापन खाये जाता है
और
नज़दीकियाँ भाती भी नहीं…

- Shilpy Aggarwal

एहसास उमड़ते तो हैं
नज़रबंद से मगर रहा करते हैं…

- Shilpy Aggarwal

झुकने के लिए पर्याप्त लचीलापन रखो,
उतनी दृढ़ता भी रहे
कि कोई झुका ना सके…
- Shilpy Aggarwal

भोले बाबा,
श्रावण मास में भीड़ उमड़ पड़ी है सड़कों पर,
जनजीवन पर इसके व्यापक असर को देखकर मन में प्रश्न उठता है, क्या सचमुच ऐसी भक्ति तुझे स्वीकार्य है???


- Shilpy Aggarwal

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दौड़ती-सी इस ज़िंदगी में
खुशियों की कमी तो नहीं
हाँ मगर उनमें
अब वो स्वाद न रहा…


- Shilpy Aggarwal

बड़ी शिद्दत से खुशियों को
सहेजा था अलमारी में
दर्द को अहमियत न दी
रख दिया था अंधेरों में
आज जब दिल टटोला तो
दर्द सारे ही गहरे निकले
सजी हर मुस्कुराहट पर
अब उदासी के पहरे निकले

— शिल्पी

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बेशक शुष्क रहा करे ज़िंदगी की ज़मीन,
उम्मीद के बादल
कभी तो फुहारें लेकर आयेंगे।
- Shilpy Aggarwal