Quotes by bhagwat singh naruka in Bitesapp read free

bhagwat singh naruka

bhagwat singh naruka

@mystory021699
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मेरी बहन के लिए दो लाईन 💕✍️✍️

तू मेरा बड़ा भाई नहीं,
मेरी ढाल है, मेरा साया है।
दुनिया चाहे जैसी भी हो जाए,
तेरे होने से हर डर पराया है।
मेरी हर ज़िद पर डाँट भी तेरी,
और हर आँसू पर
सबसे पहले तेरा कंधा आया है।
छोटी हूँ मैं, ये दुनिया याद दिलाती है,
पर तू हमेशा कहता है —
“जब तक मैं हूँ,
तू कभी अकेली नहीं है।”

writer bhagwat singhnaruka ✍️🙏

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life में किसी को बिना मांगें सब मिल जाता है ओर किसी को ???

writer bhagwat singhnaruka

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दिखावट करने से क्या इंसान महान होता है?
अगर होता है तो
मेरे पास लाखों अमीर दोस्त होते हैं।
महान वो नहीं जो कपड़ों से चमक जाए,
महान वो है
जो वक़्त पर साथ निभा जाए।
जेब भारी होने से क़द नहीं बढ़ता,
किरदार भारी हो
तो नाम ऊँचा होता है।
मैं अमीरी नहीं,
इंसानियत को दोस्त मानता हूँ,
क्योंकि दिखावे से नहीं,
सच से इंसान
महान होता है।

writer bhagwat singhnaruka ✍️✍️

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सुकून है कहाँ, मुझे आज तक पता नहीं चला,
हर मोड़ पर ढूँढा,
पर तेरा कोई पता नहीं मिला।
भीड़ में भी तन्हा रहा,
ख़ामोशी में भी शोर मिला,
जिसे दिल का ठिकाना कहूँ,
वो एक पल को भी नहीं मिला।
ढूँढता हूँ तुझे ऐ सुकून,
कभी नींद में, कभी दुआ में,
पर हर बार आँख खुली तो
हाथ खाली ही मिला।
शायद तू किसी सादे से लम्हे में छुपा है,
या फिर इस बेचैन दिल ने ही
तुझे पहचानना
आज तक नहीं सीखा।

#writer_bhagwat singhnaruka ✍️

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सच बोलने से अगर रिश्ते टूटते हैं,
तो आज से झूठ ही मेरा
धर्म–कर्म है।
क्योंकि यहाँ सच ने
सिर्फ़ अकेलापन दिया,
और झूठ ने
तालियाँ और अपनापन।
मैंने आईना दिखाया था बस,
पर लोगों को
चेहरे नहीं,
नक़ाब पसंद आए।

writer bhagwat singhnaruka ✍️

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आख़िरी होगा मेरा हर शब्द, आख़िरी होगा हर सफ़र,
जहाँ मेरे जज़्बात की क़दर नहीं,
वहाँ का सफ़र ही क्यों करूँ उम्र भर।
बहुत चल लिया उन राहों पर
जहाँ सुनना कोई चाहता नहीं था,
अब ख़ामोशी को चुन लिया है मैंने,
कम से कम ये मुझे तोड़ता नहीं था।
जो समझे बिना आँकते रहे,
उनसे कोई शिकायत नहीं,
बस अब उन दरवाज़ों पर दस्तक नहीं दूँगा
जहाँ इज़्ज़त की जगह नहीं।
मैं रुक नहीं रहा,
बस दिशा बदल रहा हूँ,
जहाँ दिल हल्का हो,
अब वही मेरा सफ़र होगा।

writer bhagwat singhnaruka ✍️

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आख़िरी होगा मेरा हर शब्द, आख़िरी होगा हर सफ़र,
जहाँ मेरे जज़्बात की क़दर नहीं,
वहाँ का सफ़र ही क्यों करूँ उम्र भर।
बहुत चल लिया उन राहों पर
जहाँ सुनना कोई चाहता नहीं था,
अब ख़ामोशी को चुन लिया है मैंने,
कम से कम ये मुझे तोड़ता नहीं था।
जो समझे बिना आँकते रहे,
उनसे कोई शिकायत नहीं,
बस अब उन दरवाज़ों पर दस्तक नहीं दूँगा
जहाँ इज़्ज़त की जगह नहीं।
मैं रुक नहीं रहा,
बस दिशा बदल रहा हूँ,
जहाँ दिल हल्का हो,
अब वही मेरा सफ़र होगा।

writer bhagwat singhnaruka ✍️

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लाख कोशिश करके देख लिया तुमने,
लेकिन हम गिरे नहीं।
आँधियाँ बहुत आईं हमारी राह में,
मगर हमारे इरादे
कभी झुके नहीं।
ताने, साज़िशें, और चालें भी कम न थीं,
फिर भी अपने वजूद से
हम डिगे नहीं।
आज खामोश हैं तो इसे कमज़ोरी मत समझना,
वक़्त आने पर साबित करेंगे —
हम टूट सकते हैं,
पर कभी गिरे नहीं।

writer bhagwat singhnaruka

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कसूर तुम्हारा नहीं, ये तो वक़्त का ही खेल था,
शिकायत तुमसे नहीं,
अपने आप से है जो सच समझने में देर हो गई।
तुम वही थे जो पहले दिन थे,
बस मेरी नज़र को पहचानने में
थोड़ी देर हो गई।
मैं हालात को दोष देता रहा उम्र भर,
और भूल गया कि
कई बार गलतियाँ
ख़ामोशी से खुद से भी हो जाती हैं।
आज समझ आया है सब कुछ,
पर अफ़सोस यही है कि
समझ आने तक
कई अपने दूर हो गए।
writer bhagwat singhnaruka

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बदन मेरा मिट्टी का, साँस मेरी उधर है,
जहाँ जीवन थमता है
और मृत्यु का अर्थ उभरता है।
मृत्यु अंत नहीं, एक ठहराव है बस,
जहाँ थकी हुई आत्मा
अपने बोझ उतारती है।
जीवन ने जो सवाल दिए,
मृत्यु उन पर विराम लगाती है,
ना जीत, ना हार —
बस एक पूर्णता सिखाती है।
आज जी रहा हूँ तो सीखने के लिए,
कल जाऊँगा तो
मिट्टी में मिलकर
फिर से सृजन बन जाने के लिए।
क्योंकि
जीवन यात्रा है,
और मृत्यु घर वापसी।

writer bhagwat singhnaruka

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