Quotes by Dharmik Dhameliya in Bitesapp read free

Dharmik Dhameliya

Dharmik Dhameliya

@drdharmik


एक कहानी एसी भी ...

हथेली पे लिखि लकिर पे गम का अधिकार हे तो क्या हुआ !!
एक हि लकिर चाहिए खुशी के लिए, जिस पे मेरी बहेन का नाम हो..

आंखों को भिगोये एसा कोइ गम हि नहीं हे
क्योकि,ये शरबती आँखो मे गम के लिए जगह हि नहीं हे ..

रिवायतो कि सियासत बहुत देखि होगी जहाँ मे
लेकिन ये तो खुद एक रिवायत हे इस जहाँ मे

रुहानियत कि बात सुनाउ या मजहब का एहसास
जो भी सुनो, याद रखो, हे नुरानि रुह मेरे पास

कइ जन्मो के बाद सागर मे किनारा दिखा हे मुझे
क्योकि जिंदगी मे मेरी बहेन का साथ मिला हे मुझे

फ़िर से वो पुरानी बाते आफ़्ताब और चाँद कि सुनो
आज तो लग रहा हे ,वो इश्क को मजहब बना के हि छोड़ेगे ..

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माँ.. जिंदगी का सबसे खुबसुरत पन्ना
जो प्रेम और सिर्फ़ प्रेम से ही लिखा गया!!

आंसु को हमेंशा आँचल मे हि छिपादेगी
तुम्हारे सामने मुस्कुराहट का हि सहेरा पहेनेगी

किराए से मकान मे कर्जदार बनाया है उपरवाले ने
मेरी माँ जेसा किरदार भी बनाया है उपरवाले ने

कितनि भि नादानि कर लो, कितनि भी बदनामी कर लो
या चाहे कितने भी इल्ज़ाम लगा लो..हर ज़ुल्म
सह लेगी लेकिन तुम्हारे दामन पे एक भी दाग नहीं
सह पायेगी.. हा वो हि तो माँ हे मेरी!!

दुनिया की नज़रमे हु मे शिशे का टूटा टुकडा
लेकिन क्या फ़र्क पड़ता है ¿¿!!
क्योकि अक्सर मेरी माँ कहेती है;शिशा टुट के भी
अपना कर्म नहीं भुलता है, वो अपना काम बेखुबी निभाता है !!
और वो टुटने के बाद और भी घातक हो जाता है!

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