रंग से गोरी न थी.. लेकिन सुन्दर थी.. - बहुत ऊँची न थी..... लेकिन मेरे लिए योग्य थी...
प्रेम देने वाली न सही... मेरे कदमो से कदम मिलाती थी... मंदिर - मस्जिद आने से इनकार करती थी...
लेकिन बाहर मेरा इंतजार करती थी.... कही भी जाओ मेरे लिए रुक जाती थी.... वो जैसी भी थी मेरी चप्पल थी.. पता नहीं कौन उठाकर ले गया