घर में भंडारा हुआ था।
सबने प्रसाद खा लिया, लेकिन सास के लिए प्रसाद खत्म हो गया।
छोटी बहू बोली —
“माँजी, मेरा तो झूठा हो गया है, मैं नहीं दे सकती…
नहीं तो मुझे नरक मिलेगा।”
सास बोली —
“मुझे तो बहुत भूख लगी है, झूठा ही दे दो।”
तभी बड़ी बहू ने अपनी थाली देखी।
उसने तो बस एक कौर ही खाया था।
एक पल को उसने सोचा —
“अगर मैं झूठा दूंगी तो शायद नरक मिलेगा…”
लेकिन अगले ही पल उसके मन ने कहा —
“मैं खुद खा लूं और मेरी सास भूखी रह जाए,
इससे बड़ा पाप क्या होगा?”
और उसने चुपचाप पूरी थाली
सास के आगे रख दी।
✨ सीख:
भगवान नियमों से नहीं,
दिल की सच्चाई से खुश होते हैं।