आइने में जो अक्स है, वो सबसे जुदा है
मेरे जैसा बनाना, बस उस रब्ब की अदा है
जब कुदरत ने मुझे 'Unique' ही बनाया है
तो क्यों मैं किसी और का साया बनूँ?
अपनी हकीकत छोड़, क्यों पराया बनूँ?
I'm the only one, मेरे जैसा कोई नहीं
तो मैं किसी और जैसी क्यों बनूँ? (No way...)
मेरी रूह की नक़ल, कोई कर नहीं सकता
फिर मैं किसी और के रंग में क्यों ढलूँ?
नैन-नक्श उनके हसीन होंगे, माना मैंने
पर मेरा वजूद भी तो एक मुकम्मल ख्वाब है
दुनिया कहती है 'किसी और जैसा बनो'
पर मैं अपनी चमक से, खुद का आफताब बनूँ
Just me, myself, and I...
I’m an original...
Not a copy.
DHAMAK