मुझे इतने रंग क्यों दिए जा रहे हैं?
क्या कोई मुझे बताएगा।
क्या कमी रह गई थी, जो तुम सबने मिलकर मुझे मेरे अपने रंगों से परे कर, तुम्हारे रंग में रंगने की कोशिश की।
क्या तुम्हें एक पल के लिए भी मेरा ख़याल नहीं आता, जब तुम सब केवल अपने-अपने शौक़ पूरे करने के लिए मुझे अपने-अपने तरीक़े से रंगने की कोशिश करते हो।
हाँ, तुम्हारे शौक़ हैं, तुम खुश होते हो, और तुम्हारी खुशी मेरे लिए ऊर्जा का स्रोत है।
पर इस तरीक़े से मुझे ऊर्जा मिलेगी—ऐसा तो मैंने कभी नहीं सोचा था।
मुझे उस कायनात ने इतने रंगों से रंगा है कि तुम्हारे दिए हुए एक रंगीन दिन से मुझे हानि ही होगी।
क्योंकि दिन में तुम मुझे रंग-बिरंगे काग़ज़ों से सजा देते हो,
और रात होते ही चमचमाते जहरीले धुएँ से मेरे रंगों को मटमैला करने की कोशिश करते हो।
लेकिन मैं तुम्हारे जैसा नहीं कि तुम्हारी खुशी भूल जाऊँ।
मैं तुम्हें रोज़ खिलती हुई रोशनी देता हूँ,
और रात में सुकून बनी चाँदनी की चमक,
और कभी-कभी बारिश के समय तुम्हें इतने रंगों से रंग देता हूँ।
ऐसा क्यों?
मैं ही बता देता हूँ—
क्योंकि तुम एक इंसान हो,
और मैं आसमान,
जो कुदरत का एक नूर हूँ।