दोहे
भाई, बहिन, पुत्र, माता, पिता ।
1 भाई
लक्ष्मण सम भाई नहीं,त्यागा है घर द्वार।
बड़े भ्रात के साथ में, रक्षा का धर भार।।
2 बहिन
कृष्ण-द्रौपदी की कथा, भाई बहिन का प्यार।
चीर हरण पर बहन का, संकट से उद्धार।
3 पुत्र
दशरथ के हर पुत्र में, पितृ भक्ति सम्मान।
राज पाट को छोड़कर, रखा वचन का मान।।
4 माता
माता है इस जगत में, सबकी पूजन हार।
भक्ति भाव आराधना, धर्म सनातन सार।।
5 पिता
मुखिया है परिवार का, पिता लगाता दाँव।
दुख दर्दों को भूलकर, देता सबको छाँव ।।
मनोज कुमार शुक्ल " मनोज "
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