कदम आज कुछ इस तरह चल पड़े है कामयाबी की और .....
कही पथ्थर है तो कही खाई ।
कदमो ने चलना सिख दिया और जिंदगी ने लड़ना ।
मृगजल तो कई आये रास्ते में दिल को लुभाने को ।
लेकिन मन के यकीन को डिगा नही पाया।
मंजिल कुछ इस तरह नज़र के सामने आई है आज।
दिल मे सुकून है ; होठो पे हँसी ;
और पैरो में थनगनाहट ।
लगता है जैसे कि कोई
बरसो पुराना ख़्वाब मुकमल हुआ है ।
Dr.Divya