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शिगाफ़- मनीषा कुलश्रेष्ठ By राजीव तनेजा

स्मृतियों के धुंधलके सायों को जब कभी अपने ज़हन में मैं बिना किसी पदचाप के उमड़ते घुमड़ते देखता हूँ तो अक्सर पाता हूँ कि कश्मीर की यादें...वहाँ की हर चीज़..हर बात, पहले ही की तरह अपने प...

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पुस्तक समीक्षा - 14 By Yashvant Kothari

यशवंत कोठारी की पुस्तकों की समीक्षाएं दफ्तर में लंच लेखक: यश वन्त कोठारी प्रकाषक: हिन्दी बुक सैंटर, आसफ अली रोड, दिल्ली-2 पृप्ठ: 83 मूल्य: 60 रु. । राप्टदूत साप्ताहिक के पाठक व्...

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समीक्षा के आइने में-रत्नावली By ramgopal bhavuk

समीक्षा के आइने में-रत्नावली वेदराम प्रजापति ‘मनमस्त’ कभी- कभी, विनोद के लहजे में कही गई अटल सत्य ब...

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उपन्यास मछुआरे -तक्षि शिव शंकर पिल्लै By राजनारायण बोहरे

तकसी शिवशंकर पिल्लै मलयाली साहित्य के बड़े प्रसिद्ध उपन्यासकार हैं। उनके तीन सर्वोत्तम उपन्यास "तोट्टी यू डे मगन"(हिन्दी मे चुनौती शीर्षक ) रन्टी टगसी ( दो सेर धान) और चेम्मीन है...

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हमें हैं चंगे...बुरा ना कोय- सुरेन्द्र मोहन पाठक By राजीव तनेजा

टीवी...इंटरनेट और मल्टीप्लेक्स से पहले एक समय ऐसा भी था जब मनोरंजन और जानकारी के साधनों के नाम पर हमारे पास दूरदर्शन, रेडियो,अखबारें और बस किताबें होती थी। ऐसे में रेडियो और दूरदर्...

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सुधी समीक्षकों की दृष्टि में ‘रत्नावली‘ By ramgopal bhavuk

सुधी समीक्षकों की दृष्टि में ‘रत्नावली‘ पुस्तक- रत्नावली उपन्यास, लेखक- रामगोपाल भावुक, प्रकाशक - पराग बुक्स नई दिल्ली संस्करण - 2018 पृष्ठ - 112 मूल्य- 20...

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लाल पोस्ते के फूल - आ लाए चाइनीज लेखक By राजनारायण बोहरे

चाइनीज लेखक आ लाए का उपन्यास "लाल पोस्ते के फूल "का अनुवाद अंग्रेजी के मार्फत आनंद स्वरूप वर्मा ने किया है यानी इस उपन्यास का जो अंग्रेजी अनुवाद था उसका हिंदी अनुवाद आनंद स्वरूप वर...

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ट्वेल्थ फेल - अनुराग पाठक By राजीव तनेजा

किसी ऐसी किताब के बारे में अगर पहले ही इतना कुछ लिखा..सुना एवं पढ़ा जा चुका हो कि उस पर लिखते वक्त सोचना पड़ जाए कि ऐसा क्या लिखा जाए जो पहले औरों ने ना लिखा हो। एक ऐसी किताब जो पहले...

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भवभूति’ समीक्षात्मक टिप्पणी- महेश अनघ By ramgopal bhavuk

काव्य-प्रसूतिगृह का वास्तुविन्यास समीक्षात्मक टिप्पणी महेश अनघ लेखक रामगो...

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हीरालाल नागर की पुस्तक - जंगल के खिलाफ By राज बोहरे

हीरालाल नागर की पुस्तक कवितासंग्रह- जंगल के खिलाफ अंनछुए क्षेत्र में पहुंचती हुई-कविताएं जंगल के खिलाफ कवि हीरालाल नागर के कविता संग्रह जंगल के खिलाफ की कविताएं हमारे आसपास क...

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सिधपुर की भगतणें - लक्ष्मी शर्मा By राजीव तनेजा

किसी भी क्षेत्र के समाज..वहाँ की संस्कृति...वहाँ की भाषा और रीति रिवाजों को जानने..समझने का सबसे बढ़िया तरीका है कि वहाँ के ग्रामीण अंचल की तसल्लीबख्श ढंग से खोज खबर लेते हुए..सुद्ध...

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कालिदास के काव्य में सौन्दर्य विधान By ramgopal bhavuk

कालिदास के काव्य में सौन्दर्य विधान एक शौधपूर्ण कार्य रामगोपाल भावुक...

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अ़क्षय आश्रम’ उपन्यास - अनंग पाल सिंह भदौरिया‘अनंग By ramgopal bhavuk

उपन्यास ‘अ़क्षय आश्रम’ उपन्यास कवि कथाकार अनंग पाल सिंह भदौरिया‘अनंग’ की कृति पर एक दृष्टि। पुस्तक : अ़क्षय आश्रम’ लेखक : अनंग पाल सिंह भदौरिया‘अनंग’ पृष्ठ :132 मूल्य : 3...

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उपन्यास हमारा शहर उस बरस - गीतांजलि श्री By राज बोहरे

साम्प्रदायिक विद्वेश का कच्चा चिटठा -हमारा शहर उस बरस राजनारायण बोहरे गीतांजलि श्री हिंदी की उन लेखिकाओं में से हैं जो कम लिखने के बाद भी खूब चर्चित हैं। इस चर्चा का कारण उनकी रचन...

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समाज का सच व्यंग्य गणिका -डॉ0 अवधेश चंसौलिया By ramgopal bhavuk

पुस्तक समीक्षा समाज का सच व्यंग्य गणिका पुस्तक : व्यंग्य गणिका काव्य-संकलन लेखक : रामगोपाल भावुक पृष्ठ : 104 मूल्य :125 /- प्रकाशक : रजनी प्रकाशन Delhi 110051 पुस्तक समीक्...

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‘मुखबिर‘ उपन्यास समीक्षा -राधा रमण वैद्य By राज बोहरे

व्यवस्था की बखिया उधेड़ता उपन्यास - मुखविर ई0एम0फास्टर अपनी किताब ‘पैसेज टू इंडिया‘में कहते हैं कि जब आप दुनिया के साथ जुड़ते हैं तो उसे समझ पाते हैं । ग्वालियर चंबल संभाग डाक...

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एक कप चाय और...तुम- सुनील पंवार By राजीव तनेजा

अमूमन ऐसा होता है कि जब मैं कोई किताब ऑनलाइन मँगवाता हूँ या फिर कोई मित्र स्नेहवश मुझे अपनी किताब उपहार स्वरूप पढ़ने के लिए भेजता है तो उस किताब पर सरसरी नज़र दौड़ाने के बाद मैं उसे क...

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विभोम.स्वर - समीक्षा By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

समीक्षा ‘‘हिन्दी चिंतन का विश्व व्यापी निनाँद’ प्रमुख संपादक सुधा ओम ढींगरा-पत्रिका ‘‘विभोम.स्वर’’-जनवरी मार्च2017...

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पारूल दी - दिनेश पाठक By राज बोहरे

पुस्तक समीक्षा पारूल दी - उम्दा कथाओं का गुलदस्ता- राजनारायण बोहरे पुस्तक - पारूल दी कथा संग्रह...

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अक्षय आश्रय - अनंग पाल सिंह By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

अक्षय आश्रय उपन्यास अनंग पाल सिंह अनंग समीक्षा-वेदराम प्रजापति मनमस्त जीवन के अहाने है , बदले य...

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धूल पौधों पर- गोविंद मिश्र By राज बोहरे

उपन्यास धूल पौधों पर,- गोविंद मिश्ररोचक व विचारोत्तेजकगोविन्द मिश्र का दसवां उपन्यास ’धूल पौधों पर’ अपेक्षाकृत छोटे आकार का सधा हुआ उपन्यास है। इसमें मिश्रजी एक ऐसे क्षेत्र में कथा...

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आलोचना की अदालत समीक्षक वेदराम प्रजापति By राजनारायण बोहरे

कृति आलोचना की अदालत कथाकार श्री राजनारायण बोहरे जी सम्ंपादक के.बी.एल पाण्डेय जी उदीप्त प्रकाशन लखमीपुरा खीरी उ.प्र. समीक्षक वेदराम प्रजापति मनमस्त कृति आलोचना की अदालत...

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इदन्नमम लेखिका-मैत्रेयी पुष्पा By राज बोहरे

पुस्तक-इदन्नमम लेखिका-मैत्रेयी पुष्पा बुंदेलखण्ड के वर्तमान समाज और संघर्ष की तस्वीर-इदन्नमम मैत्रेयी पुष्पा हिन्दी कथा साहित्य में आंचलिकता की सोंधी सुगन्ध की सशक्त लेखिका...

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अपने-अपने रामः भगवानसिंह By राज बोहरे

उपन्यास अपने-अपने रामः भगवानसिंह कुछ और परिश्रम की जरूरत थी कुछ मिथक और चरित्र किसी जाति, कौम और धर्म की मिल्कियत बन जाते हैं, जबकि कुछ मिथक, चरित्र और धर्म सार्वजनिक होने क...

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माउथ ऑर्गन - सुशोभित By राजीव तनेजा

कई बार कुछ किताबों में समाए ज्ञान(?) को पढ़ कर तो कई बार कुछ लेखकों का लिखा पढ़ कर आप उनका इम्तिहान लेते हैं या लेने की सोचते हैं कि बंदे ने आखिर इसमें क्या और कैसा लिखा है? मगर कई ब...

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मेरी प्रिय कथाएं-राजबोहरे का कहानी संग्रह By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

राजनारायण बोहरे का कहानी संग्रह मेरी प्रिय कथाएं ज्योति प्रकाशन पर्व से प्रकाशित हुआ है, इसमें बौहरे जी की 10 कहानियां शामिल हैं ! दसवीं कहानी मुहिम एक लंबी कहानी है , जो बौहरे जी...

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सुनील चतुर्वेदी - उपन्यास- ‘गाफिल’ By राज बोहरे

सुनील चतुर्वेदी का उपन्यास ‘गाफिल’ राजनारायण बोहरे उपन्यास-गाफिल लेखक-सुनील चतुर्वेदी प्रकाशक-अन्तिका प्रकाशन दिल्ली सुनील चतुर्वेदी जब भी नया उपन्यास लेकर आते हैं उनके पास सर्वथा...

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अगन पाखी (उपन्यास) मैत्रेयी पुष्पा By राजनारायण बोहरे

पुस्तक समीक्षा- ग्रामीण स्त्री की महागाथा - अगनपाखी समीक्षक - राजनारायण बोहरे अगनपाखी उपन्यास कथा लेखिका का मैत्रैयी पुष्पा का नया उपन्यास है और इस उपन्यास को लेखिका के रचना...

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विरहिणी राधा-. राजा मीरेन्द सिंह By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

विरहिणी राधा-. राजा मीरेन्द सिंह ;मगरौरा. ग्वालियर चिंतन झरोखे से एक दृश्य वेदराम प्रजापति मनमस्त पृष्ठांकन सहित अस्सी पृ...

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बाजार में रामधन - कैलाश बनवासी By राज बोहरे

कैलाश वनवासी का कथा संग्रह भौंचक खडे रामधन और बाजार में बदलता समाज प...

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केशर कसूरी:शिवमूर्ति By राज बोहरे

कहानी संग्रह केशर कसूरी:शिवमूर्ति स्त्री विमर्श और आमजन की सशक्त कहानियां अपनी कम कहानियों के बूते पर ही आठवें दशक के कहानीकारों की पहली पंक्...

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आलोचना की अदालत-राजनारायण बोहरे By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

कृति आलोचना की अदालत कथाकार श्री राजनारायण बोहरे जी सम्ंपादक के.बी.एल पाण्डेय जी उदीप्त प्रकाशन लखमीपुरा खीरी उ.प्र. समीक्षक वेदराम...

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अटकन चटकन- वंदना अवस्थी दुबे By राजीव तनेजा

क़ुदरती तौर पर कुछ चीज़ें..कुछ बातें...कुछ रिश्ते केवल और केवल ऊपरवाले की मर्ज़ी से ही संतुलित एवं नियंत्रित होते हैं। उनमें चाह कर भी अपनी मर्ज़ी से हम कुछ भी फेरबदल नहीं कर सकते जैसे...

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स्वतंत्र सक्सेना-सरल नहीं था यह काम By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

समीक्षा के आईने में ’’सरल नहीं था यह काम और अन्य कविताएं’’ समीक्षक - वेदराम प्रजापति‘ मनमस्त’तटस्थ नीति के अध्येता ,चिंतन के सहपाठी और ईमानदारी की जमीन को तराशने में हमेशा निरत ,स्...

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उपन्यास महाकवि भवभूति- रामगोपाल भावुक By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

उपन्यास महाकवि भवभूति - समीक्षात्मक अध्ययन वेदराम प्रजापति ‘मनमस्त’ पद्मावती, पवाया पंचमहल डबरा भवभूति नगर का ए...

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भावुक’ के व्यक्तित्व एवं कृतित्व का समीक्षात्मक अध्ययन By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

शोधग्रंथ रामगोपाल तिवारी‘ भावुक’ के व्यक्तित्व एवं कृतित्व का समीक्षात्मक अध्ययन समीक्षक वेदराम प्रजापति ’बरिष्ठ कवि जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर...

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यूपी 65- निखिल सचान By राजीव तनेजा

कई बार पढ़ते वक्त कुछ किताबें आपके हाथ ऐसी लग जाती हैं कि पहले दो चार पन्नों को पढ़ते ही आपके मुँह से बस..."वाह" निकलता है और आपको लेखक की लेखनी से इश्क हो जाता है। यकीनन कुछ ना कुछ...

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रत्नावली रामगोपाल भावुक समीक्षा By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

रत्नावली रामगोपाल भावुक समीक्षा के आइने में- वेदराम प्रजापति ‘मनमस्त’ कभी- कभी, विनोद के लहजे में कही गई अटल सत्...

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नरोत्तमदास पाण्डेय ’’मधु’’ -भाषा और शिल्प By कृष्ण विहारी लाल पांडेय

भाषा और शिल्प भाषा अभिव्यक्ति का सहज और प्रमुख माध्यम है। साहित्य के क्षेत्र में अनुभूति के रूप-विधान की सभी पद्धतियाँ भाषा पर ही आश्रित होती हैं। व...

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रावण-आर्यवर्त का शत्रु- अमीश त्रिपाठी By राजीव तनेजा

किसी को उनकी लेखनी दिलचस्प, बाँध लेने वाली तथा जानकारी से भरपूर नज़र आती है। तो कोई उन्हें भारत के महान कथाकारों में शुमार करता है। कोई उन्हें भारत का पहला साहित्यिक पॉपस्टार कहता ह...

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नरोत्तमदास पाण्डेय ‘मधु’ की वैचारिकता By कृष्ण विहारी लाल पांडेय

नरोत्तमदास पाण्डेय ‘मधु’ की वैचारिकता काव्य में भाव-तत्त्व के साथ ही विचार-तत्त्व का भी काव्य में बहुत महत्त्व है। जीवन में अनेक स्थितियों का प्रभाव केवल हार्दिक उद्...

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नरोत्तमदास पाण्डेय ‘मधु’ का स्फुट काव्य By कृष्ण विहारी लाल पांडेय

नरोत्तमदास पाण्डेय ‘मधु’ का स्फुट काव्य उपर्युक्त प्रबन्ध रचनाओं और मुक्तक कृतियों के अतिरिक्त ‘मधु’का प्रभूत काव्य स्फुट रूप में है। स्फुट काव्य में कहीं-कहीं क...

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पिघली हुई लड़की- आकांक्षा पारे By राजीव तनेजा

आम कहानियों की अपेक्षा अगर किसी कहानी में प्रभावी ढंग से समाज में पनप रही विद्रूपताओं का जिक्र हो तो मेरे ख्याल से उस कहानी की उम्र आम कहानियों की अपेक्षा ज़्यादा लंबी हो जाती है। अ...

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नरोत्तम दास पाणेय ‘‘मधु’’ की मुक्त कृतियां By कृष्ण विहारी लाल पांडेय

नरोत्तम दास पाणेय ‘‘मधु’’ की मुक्त कृतियां काव्य के निर्बन्ध स्वरूप को मुक्तक कहा जाता है। ‘अग्निपुराण’ में ऐसे श्लोक को मुक्तक कहा गया है जो स्वयं में ही चमत्कारक्षम हो-...

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नरोत्तमदास पाण्डेय ‘‘मधु’’ की प्रबंध कृतियां By कृष्ण विहारी लाल पांडेय

नरोत्तमदास पाण्डेय ‘‘मधु’’ की प्रबंध कृतियां ‘‘मधु’’ की प्रबंध कृतियाँ काव्य रूपों की दृष्टि से दो प्रकार की हैं। कुछ कृतियाँ खण्डकाव्य की कोटि की हैं...

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प्रकाशकान्त: मकतल By राज बोहरे

समीक्षा- मकतल: प्रकाशकान्त साजिशन सजा की दर्दगाथा अपनी सोच साफगोई और सकारात्मक दृष्टि के लिए मशहूर कथाकार प्रकाश कान्त का उ...

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शिगाफ़- मनीषा कुलश्रेष्ठ By राजीव तनेजा

स्मृतियों के धुंधलके सायों को जब कभी अपने ज़हन में मैं बिना किसी पदचाप के उमड़ते घुमड़ते देखता हूँ तो अक्सर पाता हूँ कि कश्मीर की यादें...वहाँ की हर चीज़..हर बात, पहले ही की तरह अपने प...

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पुस्तक समीक्षा - 14 By Yashvant Kothari

यशवंत कोठारी की पुस्तकों की समीक्षाएं दफ्तर में लंच लेखक: यश वन्त कोठारी प्रकाषक: हिन्दी बुक सैंटर, आसफ अली रोड, दिल्ली-2 पृप्ठ: 83 मूल्य: 60 रु. । राप्टदूत साप्ताहिक के पाठक व्...

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समीक्षा के आइने में-रत्नावली By ramgopal bhavuk

समीक्षा के आइने में-रत्नावली वेदराम प्रजापति ‘मनमस्त’ कभी- कभी, विनोद के लहजे में कही गई अटल सत्य ब...

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उपन्यास मछुआरे -तक्षि शिव शंकर पिल्लै By राजनारायण बोहरे

तकसी शिवशंकर पिल्लै मलयाली साहित्य के बड़े प्रसिद्ध उपन्यासकार हैं। उनके तीन सर्वोत्तम उपन्यास "तोट्टी यू डे मगन"(हिन्दी मे चुनौती शीर्षक ) रन्टी टगसी ( दो सेर धान) और चेम्मीन है...

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सुधी समीक्षकों की दृष्टि में ‘रत्नावली‘ By ramgopal bhavuk

सुधी समीक्षकों की दृष्टि में ‘रत्नावली‘ पुस्तक- रत्नावली उपन्यास, लेखक- रामगोपाल भावुक, प्रकाशक - पराग बुक्स नई दिल्ली संस्करण - 2018 पृष्ठ - 112 मूल्य- 20...

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लाल पोस्ते के फूल - आ लाए चाइनीज लेखक By राजनारायण बोहरे

चाइनीज लेखक आ लाए का उपन्यास "लाल पोस्ते के फूल "का अनुवाद अंग्रेजी के मार्फत आनंद स्वरूप वर्मा ने किया है यानी इस उपन्यास का जो अंग्रेजी अनुवाद था उसका हिंदी अनुवाद आनंद स्वरूप वर...

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ट्वेल्थ फेल - अनुराग पाठक By राजीव तनेजा

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भवभूति’ समीक्षात्मक टिप्पणी- महेश अनघ By ramgopal bhavuk

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हीरालाल नागर की पुस्तक - जंगल के खिलाफ By राज बोहरे

हीरालाल नागर की पुस्तक कवितासंग्रह- जंगल के खिलाफ अंनछुए क्षेत्र में पहुंचती हुई-कविताएं जंगल के खिलाफ कवि हीरालाल नागर के कविता संग्रह जंगल के खिलाफ की कविताएं हमारे आसपास क...

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कालिदास के काव्य में सौन्दर्य विधान By ramgopal bhavuk

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अ़क्षय आश्रम’ उपन्यास - अनंग पाल सिंह भदौरिया‘अनंग By ramgopal bhavuk

उपन्यास ‘अ़क्षय आश्रम’ उपन्यास कवि कथाकार अनंग पाल सिंह भदौरिया‘अनंग’ की कृति पर एक दृष्टि। पुस्तक : अ़क्षय आश्रम’ लेखक : अनंग पाल सिंह भदौरिया‘अनंग’ पृष्ठ :132 मूल्य : 3...

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उपन्यास हमारा शहर उस बरस - गीतांजलि श्री By राज बोहरे

साम्प्रदायिक विद्वेश का कच्चा चिटठा -हमारा शहर उस बरस राजनारायण बोहरे गीतांजलि श्री हिंदी की उन लेखिकाओं में से हैं जो कम लिखने के बाद भी खूब चर्चित हैं। इस चर्चा का कारण उनकी रचन...

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आलोचना की अदालत समीक्षक वेदराम प्रजापति By राजनारायण बोहरे

कृति आलोचना की अदालत कथाकार श्री राजनारायण बोहरे जी सम्ंपादक के.बी.एल पाण्डेय जी उदीप्त प्रकाशन लखमीपुरा खीरी उ.प्र. समीक्षक वेदराम प्रजापति मनमस्त कृति आलोचना की अदालत...

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इदन्नमम लेखिका-मैत्रेयी पुष्पा By राज बोहरे

पुस्तक-इदन्नमम लेखिका-मैत्रेयी पुष्पा बुंदेलखण्ड के वर्तमान समाज और संघर्ष की तस्वीर-इदन्नमम मैत्रेयी पुष्पा हिन्दी कथा साहित्य में आंचलिकता की सोंधी सुगन्ध की सशक्त लेखिका...

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अपने-अपने रामः भगवानसिंह By राज बोहरे

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मेरी प्रिय कथाएं-राजबोहरे का कहानी संग्रह By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

राजनारायण बोहरे का कहानी संग्रह मेरी प्रिय कथाएं ज्योति प्रकाशन पर्व से प्रकाशित हुआ है, इसमें बौहरे जी की 10 कहानियां शामिल हैं ! दसवीं कहानी मुहिम एक लंबी कहानी है , जो बौहरे जी...

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सुनील चतुर्वेदी - उपन्यास- ‘गाफिल’ By राज बोहरे

सुनील चतुर्वेदी का उपन्यास ‘गाफिल’ राजनारायण बोहरे उपन्यास-गाफिल लेखक-सुनील चतुर्वेदी प्रकाशक-अन्तिका प्रकाशन दिल्ली सुनील चतुर्वेदी जब भी नया उपन्यास लेकर आते हैं उनके पास सर्वथा...

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अगन पाखी (उपन्यास) मैत्रेयी पुष्पा By राजनारायण बोहरे

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विरहिणी राधा-. राजा मीरेन्द सिंह By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

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बाजार में रामधन - कैलाश बनवासी By राज बोहरे

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केशर कसूरी:शिवमूर्ति By राज बोहरे

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आलोचना की अदालत-राजनारायण बोहरे By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

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स्वतंत्र सक्सेना-सरल नहीं था यह काम By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

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उपन्यास महाकवि भवभूति- रामगोपाल भावुक By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

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भावुक’ के व्यक्तित्व एवं कृतित्व का समीक्षात्मक अध्ययन By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

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यूपी 65- निखिल सचान By राजीव तनेजा

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रत्नावली रामगोपाल भावुक समीक्षा By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

रत्नावली रामगोपाल भावुक समीक्षा के आइने में- वेदराम प्रजापति ‘मनमस्त’ कभी- कभी, विनोद के लहजे में कही गई अटल सत्...

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नरोत्तमदास पाण्डेय ’’मधु’’ -भाषा और शिल्प By कृष्ण विहारी लाल पांडेय

भाषा और शिल्प भाषा अभिव्यक्ति का सहज और प्रमुख माध्यम है। साहित्य के क्षेत्र में अनुभूति के रूप-विधान की सभी पद्धतियाँ भाषा पर ही आश्रित होती हैं। व...

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रावण-आर्यवर्त का शत्रु- अमीश त्रिपाठी By राजीव तनेजा

किसी को उनकी लेखनी दिलचस्प, बाँध लेने वाली तथा जानकारी से भरपूर नज़र आती है। तो कोई उन्हें भारत के महान कथाकारों में शुमार करता है। कोई उन्हें भारत का पहला साहित्यिक पॉपस्टार कहता ह...

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नरोत्तमदास पाण्डेय ‘मधु’ की वैचारिकता By कृष्ण विहारी लाल पांडेय

नरोत्तमदास पाण्डेय ‘मधु’ की वैचारिकता काव्य में भाव-तत्त्व के साथ ही विचार-तत्त्व का भी काव्य में बहुत महत्त्व है। जीवन में अनेक स्थितियों का प्रभाव केवल हार्दिक उद्...

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नरोत्तमदास पाण्डेय ‘मधु’ का स्फुट काव्य By कृष्ण विहारी लाल पांडेय

नरोत्तमदास पाण्डेय ‘मधु’ का स्फुट काव्य उपर्युक्त प्रबन्ध रचनाओं और मुक्तक कृतियों के अतिरिक्त ‘मधु’का प्रभूत काव्य स्फुट रूप में है। स्फुट काव्य में कहीं-कहीं क...

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पिघली हुई लड़की- आकांक्षा पारे By राजीव तनेजा

आम कहानियों की अपेक्षा अगर किसी कहानी में प्रभावी ढंग से समाज में पनप रही विद्रूपताओं का जिक्र हो तो मेरे ख्याल से उस कहानी की उम्र आम कहानियों की अपेक्षा ज़्यादा लंबी हो जाती है। अ...

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नरोत्तम दास पाणेय ‘‘मधु’’ की मुक्त कृतियां By कृष्ण विहारी लाल पांडेय

नरोत्तम दास पाणेय ‘‘मधु’’ की मुक्त कृतियां काव्य के निर्बन्ध स्वरूप को मुक्तक कहा जाता है। ‘अग्निपुराण’ में ऐसे श्लोक को मुक्तक कहा गया है जो स्वयं में ही चमत्कारक्षम हो-...

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नरोत्तमदास पाण्डेय ‘‘मधु’’ की प्रबंध कृतियां By कृष्ण विहारी लाल पांडेय

नरोत्तमदास पाण्डेय ‘‘मधु’’ की प्रबंध कृतियां ‘‘मधु’’ की प्रबंध कृतियाँ काव्य रूपों की दृष्टि से दो प्रकार की हैं। कुछ कृतियाँ खण्डकाव्य की कोटि की हैं...

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प्रकाशकान्त: मकतल By राज बोहरे

समीक्षा- मकतल: प्रकाशकान्त साजिशन सजा की दर्दगाथा अपनी सोच साफगोई और सकारात्मक दृष्टि के लिए मशहूर कथाकार प्रकाश कान्त का उ...

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