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पटना का घर। 6 महीने बीते। नीरा का पेट बड़ा। "लियो आज आएगा। ऊर्जा महसूस हो रही।"...
महाभारत की कहानी - भाग-२०६ हरपार्वती से कृष्ण को वर प्राप्ति की कथा प्रस्तावना...
सर्वभूतेषुकमल चोपड़ा देवियाँ थीं कि प्रगट नहीं हो रही...
अम्मा, हू हू रोते हुए, चीख -चीख कर अम्मा ' हू हू क्या? हुआ मेरी खुशी ' क...
“अंदर के डर से लड़कर खुद की जीत तक“हार का पहला स्वादअर्जुन को हमेशा लगता था कि उ...
देव बोला --मैं मम्मी पापा से मिलने आया था तभी मुझे पता चला कि तुम यही हो इसलिए त...
एपिसोड 12: मलबे से मोहब्बत तकअस्पताल के मुख्य द्वार पर सुरक्षाकर्मियों ने एक...
वो लोग चले गए। सास–ससुर और उनके आदमी पीछे मुड़े भी नहीं। उन्हें पूरा यकीन था अब...
खामोश पन्नों की अधूरी दास्तां शहर की भागदौड़ से दूर, पुराने इलाके की उस लाइब्रे...
सन्नाटे की गूँज माया की ज़िंदगी एक खाली कमरे की तरह थी—चुपचाप, उदास और अकेली। तीस साल की हो चुकी थी वह, लेकिन शादी का ख्याल उसके मन के किसी कोने में दफन हो चुका था। वह एक छोटे से...
महाभारत की कहानी - भाग- १ शिखंडी की कहानी और भीष्म की इच्छामृत्यु प्रस्तावना संपूर्ण महाभारत पढ़ने वाले लोगों की संख्या बहुत कम है। अधिकांश लोगों ने महाभारत की कुछ कहानी पढ़ी, सु...
इस शाम की तरह जिंदगी भी ढल रही थी राधा की.... शाम के 4:00 रहे थे, राधा अपने कमरे से निकल कर बाहर आती है। क्या हुआ राधा कुछ चाहिए क्या तुम्हें? तुम उठकर क्यों चली आई मुझे ब...
दरिया, परिंदे और वो अजनबी अज़ीम …. वह ज़ोया को जाते हुए देखता है और सोचता है— "यह कैसी अजनबी थी जो आई तो एक शोर की तरह थी (महंगी गाड़ी, रुतबा), पर छोड़ एक खामोशी गई। क्या यह...
इस घर में प्यार मना है… क्योंकि यहाँ प्यार ने कभी किसी को पूरा नहीं छोड़ा। या शायद… क्योंकि इस घर का मालिक प्यार से नफरत करता है। अध्याय 1— एक अनचाही शादी “संस्कृति… तैयार...
कभी-कभी ज़िंदगी वो सवाल पूछ लेती है... जिनका जवाब सिर्फ ख़ामोशी के पास होता है। और मोहब्बत... वो अक्सर वहीं से शुरू होती है, जहाँ लोग टूट कर बिखर जाते हैं। सहर की हल्की सी रौ...
ट्रैक साँस रोके हुए था। सुपरकार वर्ल्ड चैंपियनशिप की आख़िरी रेस—जिस पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी थीं। एरीना में मौजूद हज़ारों लोग और अपनी टीवी स्क्रीनों से चिपके करोड़ों दर्शक...
यह कहानी कुछ ही दिन पहले की है। एक दिन मैं अपनी डायरी में कहानी लिख रहा था। तभी मेरी खिड़की के पास एक बिल्ली आ गई। वह “म्याऊँ-म्याऊँ” कर रही थी। मैंने उसे प्यार से “पूसी” कहकर बु...
"रात 3:12 बजे की दस्तक" — इस सीरीज के हर एपिसोड में आपको मिलेगी एक बिल्कुल नई और रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी। एपिसोड 1: रात 3:12 बजे की दस्तक रात का सन्नाटा इतना गह...
शहर की शोर-शराबे वाली गलियों के बीच एक छोटा सा कोना ऐसा था, जहाँ वक्त जैसे ठहर सा जाता था। 'रिदम कैफे'—पुरानी ईंटों की दीवारें, पीली मद्धम रोशनी और हवा में तैरती ताज़ा पिसी...
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