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महाभारत की कहानी - भाग-१७० भीम द्वारा दुर्योधन के ऊरुभंग में बलराम का क्रोध और य...
सपनों की तरह शांत सुबह थी। दीपिका अपनी बालकनी में खड़ी चाय पी रही थी। दूर तक फैल...
1957 में ही प्रयाग में साहित्यकारों का एक सम्मेलन हुआ था। उस सम्मेलन म...
आदित्य तिरु से कहता है --आदित्य :- मामा जी , पापा ने मेरे साथ ऐसा क्यू किया , क्...
बहुत पुराने समय के बाद की बात है एक घर में दो बच्चे रहते थे एक का नाम परी और दूस...
तभी निशा की नजर भी विजय और रोमी पर पड़ी फिर निशा ने गुस्से से अपनी नजर दूसरी तरफ...
शर्मा परिवार शहर के एक शांत से मोहल्ले में रहता था। घर में ज़्यादा शोर-शराबा नही...
हवेली की दीवारें कंपकपाती हुईं चुप हो चुकी थीं। अपूर्व के सामने वह दरार अब धीरे-...
अनामिका और अविनाश दोनों उस पहाड़ी के किनारे टूटी हुई रेलिंग के पास खड़े डूबते हु...
राजा और रैंचो ---अध्याय 1 – एक अनोखी मुलाकातमुंबई की हलचल भरी सड़कों पर, एक ऐसा...
हमारे राम चार वर्ष की अवस्था से चार वर्ष पिछोर में रहे वहीं विद्या का आरम्भ हुआ। दो बार श्री कालिन्द्री पर यज्ञ में जनता जनार्दन की सेवा का सौभाग्य प्राप्त हुआ। पहली बार रघुरा...
• 1. (ईश्वर का सम्बोधन) मैं ईश्वर हूँ, में कभी कुछ नही कहता किसी से नहीं कहता बस सुनता हूँ क्योंकि मैं ईश्वर हूँ। मेरा कोई धर्म नहीं न ही कोई जाति, और न कोई देश है, न तो में नर हू...
जीवन की सार्थकता के लिये,संत-भगवन्त के श्री चरणोंका आश्रय,परम आवष्यक मान कर, श्री सिद्ध-सिद्द्येश्वर महाराज की तपो भूमि के आँगन मे यशोगान,जीवन तरण-तारण हेतु अति आवश्यक मानकर...
मैं परमश्रद्धेय गुरूदेव स्वामी हरिओम तीर्थ जी के पास एक दो दिन में गुरूनिकेतन जाता रहता हूँ। यह गुरूनिकेतन स्वामी नारायण देव तीर्थजी महाराज की परम्परा का है। उस दिन जब मैं गुरूनिके...
परम पूज्य स्वामी हरिओम तीर्थ जी महाराज 1 एक अजनबी जो अपना सा लगा परम पूज्य स्वामी हरिओम तीर्थ जी महाराज ....
#पंचकन्या #भाग_1........#मानस यूँ तो सनातन धर्म में नारी सर्वत्र पूज्यनीय मानी जाती है। कहा जाता है कि यदि किसी यज्ञ को जोड़े में न किया जाय तो वो पूर्ण नहीं माना जाता चाहे वो यज्ञ...
जय श्रीकृष्ण बंधु-बांधवोंबहुत समय उपरांत फिर एक लेख लेके आपके सम्मुख उपस्थित हूँ। आप सब के स्नेह की अभिलाषा है।बंधुओ मैन श्री मद्भगवतगीता जी को पढ़ा और मुझे ह्रदय से प्रेणा हुई कि...
आज हम कुछ ऐसे विषय पर बात बात, जानकारी लेंगे जो हम सब को इसके बारे मे जानना जरूरी है । भारत का एक मजहब जिसका एक पंथ जिसकी तस्वीर हमने सिर्फ अखबार,टेलीविजन और कुछ न्युज पोर्टलों पर...
महर्षि अष्टावक्र प्रदत्त ब्रह्म-विद्या को अखिल भारतीय सन्तमत सत्संग की परम्परा के सद्गुरुओं ने इस आधुनिक युग में आनन्द-योग के रूप में व्यक्तिगत, पारिवारिक व सामाजिक जीवन में आध्यात...
शरत्ऋतु की पृर्णिमा थी , रात्रि का समय था । भगवान श्यामसुन्दर वन में पधारे । मुरलीधर ने बंशी की तान छेडी । बंशी की ध्वनि कान में पड़ते ही ब्रज…गोपियाँ व्याकुल हो गई । जिस के हाथ मे...
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