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अब आगे,संयम ने गन चला दी। वहीं अनहिरा जिसकी आंखे बंद थी उसे कुछ फील नहीं हुआ। जि...
उसकी काली आँखों की चमक अँधेरे में तैर रही थी। उसने फुसफुसाया था—“इस बार… मैं वो...
यह कहानी “मैं दादा-दादी की लाड़ली” का तीसरा अध्याय है।यह अध्याय उस मासूम एहसास क...
एपिसोड: 'विरासत का विष और अदृश्य शत्रु'खन्ना मेंशन की सुबह आज पहले जैसी...
part -3सुहानी मोबाइल को देखे जा रही थी।स्क्रीन पर वही शब्द रुके हुए थे—“H...
नियति का रक्त-अभिषेक और महाप्रस्थानकहते हैं कि विनाश से ठीक पहले की खामोशी सबसे...
: : प्रकरण - 37 : : मैं खुद एक लेखक था. अपने मित्...
रात…एक बार फिर पूरी हवेली नींद में डूबी हुई थी। पर इस बार कार्तिक नहीं सोया था।...
मटन बिरयानी की खुशबू अब भी हवा में तैर रही थी। मंत्री जगनमोहन दयाल ने उँगलियाँ ध...
अध्याय 3 : ज़िंदा तस्वीर का सचकमरे में सन्नाटा इतना गहरा था कि अंजलि को अपनी ही...
मुंबई शहर” सुबह के 7.00 बज रहे थे। “अराध्या” उठ कर बाथरूम की तरफ जाने लगी। तभी उसकी नज़र बेड से लगे टेबल पर गई । जहां एक तस्वीर रखी हुई थी। उसने तस्वीर को हाथ मे लिया और कहने लगी “...
एक सभ्य समाज में पुरुष और महिला के बीच सुंदरता से भरे संबंधों के बारे में यदि कहां जाए तो ----उसे कामसूत्र कहते हैं (क्या है ,कामवासना )और (क्या है, प्रेम), कामसूत्र से संबंधित कई...
ये दोनों एक ही कॉलेज मे पढ़ते थे जब स्कूल खतम हुवे तभी से मे ये कसम खाके ही कॉलेज मे दाखिल हुआ था की जाहे कुछ भी हो जाये मे प्यार नही करूँगा मे लड़की नाम की मुसीबत जान बुच कर अपने...
बनारस… सिर्फ़ एक शहर नहीं है, ये तो जैसे समय की गोद में बैठा हुआ एक सपना है—जिसके हर घाट पर कहानियाँ बहती हैं, और हर गली में कोई याद रुकी हुई मिलती है। ठीक वैसे ही, राजेन्द्र प्...
बह की लोकल… भीड़ में खड़ा एक लड़का… और सामने खड़ी एक लड़की — बस, वही एक नज़र काफी थी। "भाई, साइड तो दे!" कोई पीछे से चिल्लाया, और मैं झटका खाकर होश में आया। स्टेशन व...
नमस्ते जी ..मी निहारिका आपको कैसे संबोधित करू समझ नहीं आ रहा .फिर भी आशा है आप खुद हि हमे समझ लेंगे आठ दिन हुये आपको यहासे निकल कर ..|फोन पर आपसे दो तीन मर्तबा बात हुई थी..|आप ना...
चाय! सिर्फ एक पेय पदार्थ नहीं बल्कि सुकून का नाम है। दिन भर की थकान, उदासी, टेंशन को दूर करना हो तो बस एक कप चाय और सब कुछ शांत। ये चाय न सिर्फ हमारे रोज की टेंशन दूर करती है बल्कि...
आज से एक नया सफ़र शुरू… – यही सोचकर आरव ने कॉलेज के गेट पर कदम रखा। कॉलेज का पहला दिन – नई जगह, नए लोग और नए सपने। गेट से कॉलेज की इमारत का नज़ारा बहुत ही सुंदर लग रहा था। भव्...
जब मैंने आँखें बंद की तब उस स्वर्णिम वेला का मनोरम दृश्य मेरे सामने चलचित्र की भांती प्रकट हुआ। भादो की सौरभ युक्त सुबह थी, मेघाच्छन आकाश के विस्तार के नीचे कलरव करते पक्षी और वृक्...
शहरों से दूर, एक छोटा सा शहर... उस शहर की एक संकरी सी गली में एक पुराना-सा, दो मंज़िला मकान खड़ा था। बाहर से देखने पर कुछ ख़ास नहीं, मगर अंदर की दीवारों में बहुत सी कहानियाँ दबी...
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